कं भारत टाइम्स, बीकानेर
बीकानेर, 12 अगस्त। हरियाली अमावस्या के पावन अवसर पर पलाना स्थित गोशाला में धार्मिक एवं जनजागरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के दौरान विधि-विधानपूर्वक गायत्री हवन किया गया तथा ग्रामीणों को भारतीय संस्कृति, गायत्री मंत्र के महत्व और उसके नियमित जाप एवं लेखन से होने वाले आध्यात्मिक एवं मानसिक लाभों की जानकारी दी गई।
हवन के यज्ञकर्ता पवन कुमार ओझा ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ यज्ञ संपन्न कराया। उन्होंने उपस्थित ग्रामीणों को गायत्री मंत्र के महत्व के बारे में बताते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति में यज्ञ और मंत्र साधना का विशेष स्थान है। नियमित रूप से गायत्री मंत्र का जाप व्यक्ति में सकारात्मक सोच, एकाग्रता और आत्मविश्वास बढ़ाने में सहायक माना जाता है। उन्होंने ग्रामीणों से भारतीय संस्कारों एवं परंपराओं को अपने दैनिक जीवन में अपनाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में जिला संयोजक मुकेश व्यास ने भी ग्रामीणों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि समाज में जनजागृति के लिए धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजनों की महत्वपूर्ण भूमिका है। ऐसे आयोजनों के माध्यम से नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति, संस्कारों और वैदिक परंपराओं से जोड़ने का प्रयास किया जाना चाहिए। उन्होंने ग्रामीणों से सामाजिक जागरूकता के इस अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया।
इस अवसर पर डॉ. सोनाली सक्सेना ने महिलाओं को विशेष रूप से संबोधित करते हुए गायत्री मंत्र लेखन के महत्व तथा पुंसवन संस्कार के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि भारतीय वैदिक परंपरा में संस्कारों का उद्देश्य परिवार और समाज में श्रेष्ठ संस्कारों एवं सकारात्मक जीवन मूल्यों को बढ़ावा देना रहा है। उन्होंने महिलाओं को पुंसवन संस्कार की पारंपरिक अवधारणा, उसके महत्व तथा गर्भावस्था के दौरान सकारात्मक वातावरण, अच्छे विचारों और संस्कारों की भूमिका के बारे में अवगत कराया।
डॉ. सक्सेना ने महिलाओं को गायत्री मंत्र लेखन के महत्व की जानकारी देते हुए कहा कि मंत्र लेखन को नियमित साधना और आत्मचिंतन के माध्यम के रूप में अपनाया जा सकता है। इससे मन को एकाग्र करने, सकारात्मक विचारों को बढ़ावा देने तथा आध्यात्मिक वातावरण बनाने में सहायता मिल सकती है।
कार्यक्रम के दौरान महिलाओं और ग्रामीणों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। गोशाला परिसर में हवन एवं मंत्रोच्चार से आध्यात्मिक वातावरण बना रहा। आयोजकों ने कहा कि भविष्य में भी गांवों में ऐसे जनजागरण, संस्कार एवं वैदिक संस्कृति से जुड़े कार्यक्रम आयोजित कर समाज को भारतीय परंपराओं के प्रति जागरूक करने का प्रयास जारी रहेगा।

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