KBharat Times, बीकानेर
बीकानेर, 08 जुलाई, 2026 । भाकृअनुप–राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केंद्र (एनआरसीसी), बीकानेर द्वारा जनजातीय उप-योजना (टीएसपी) के अंतर्गत आज राजस्थान के प्रतापगढ़ जिले के मुंगाना एवं बिलड़ी गांवों में कृषक–वैज्ञानिक संवाद कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रमों में इन गांवों तथा आसपास के क्षेत्रों के 478 महिला एवं पुरुष किसानों एवं पशुपालकों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता निभाई।
डॉ. रतन कुमार चौधरी, वरिष्ठ वैज्ञानिक ने किसानों एवं पशुपालकों को जलवायु अनुकूल खेती, उन्नत फसल प्रबंधन, गुणवत्तायुक्त बीजों के उपयोग तथा समन्वित कृषि-पशुपालन प्रणाली के महत्व की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि आधुनिक कृषि एवं पशुपालन तकनीकों को अपनाने से उत्पादन लागत में कमी, उत्पादकता में वृद्धि तथा किसानों की आय में उल्लेखनीय बढ़ोतरी संभव है।
डॉ. श्याम सुंदर चौधरी, वैज्ञानिक ने केन्द्र की प्रसार गतिविधियों एवं वैज्ञानिक पशुधन प्रबंधन की जानकारी देते हुए पशुपालकों को नियमित टीकाकरण, संतुलित पोषण तथा स्वच्छ प्रबंधन अपनाने की सलाह दी। उन्होंने ऊँटनी के दूध के औषधीय गुणों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उष्ट्र दुग्ध व्यवसाय को अपनाकर पशुपालक अपनी आय बढ़ाने के साथ आर्थिक रूप से अधिक सशक्त बन सकते हैं।
केन्द्र के निदेशक डॉ. अनिल कुमार पूनिया ने वैज्ञानिक दल के माध्यम से अपने संदेश में कहा कि जनजातीय क्षेत्रों में कृषि एवं पशुपालन आजीविका के प्रमुख आधार हैं, किन्तु वैज्ञानिक तकनीकों, गुणवत्तायुक्त बीजों तथा आधुनिक पशुधन प्रबंधन के अभाव में अपेक्षित उत्पादन प्राप्त नहीं हो पा रहा है। उन्होंने जनजातीय किसानों एवं पशुपालकों से आधुनिक कृषि एवं पशुपालन तकनीकों को अपनाकर उत्पादन, आय एवं ग्रामीण आजीविका को सुदृढ़ बनाने का आह्वान किया।
केन्द्र की जनजातीय उप-योजना के नोडल अधिकारी श्री मनजीत सिंह ने बताया कि योजना के तहत जनजातीय किसानों को प्रशिक्षण, कृषक–वैज्ञानिक संवाद एवं जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से नवीन कृषि एवं पशुपालन तकनीकों की प्रमाणिक जानकारी उपलब्ध कराई जाती है। इस दौरान किसानों को उन्नत किस्म के मक्का बीज वितरित किए गए, जिससे बेहतर उत्पादन एवं आय में वृद्धि करने में सहायता मिलेगी।
श्री जितेन्द्र कुमार, तकनीकी अधिकारी ने बताया कि कृषक-वैज्ञानिक संवाद के दौरान किसानों एवं पशुपालकों की कृषि एवं पशुपालन संबंधी समस्याओं एवं जिज्ञासाओं का समाधान किया गया। वहीं श्री राजेश चौधरी ने पंजीयन, कृषक समन्वय एवं अन्य व्यवस्थाओं के सफल संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। दोनों गांवों के जनप्रतिनिधियों एवं ग्रामीणों ने जनजातीय क्षेत्रों में टीएसपी के अंतर्गत किए जा रहे एनआरसीसी के प्रयासों की सराहना की।

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