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प्रशासन की संवेदनशीलता से घर बैठे मिला हक, दिव्यांग गोमती को मौके पर ही मिला पालनहार योजना का लाभ ​"जब प्रशासन खुद चलकर आए पीड़ित के द्वार, तब साकार होता है सुशासन का सपना।"

 KBharat Times, बीकानेर




बीकानेर, 1 जुलाई। ​ग्रामीण सेवा शिविर 2026 के तहत बुधवार को ग्राम पंचायत उदाना में आमजन की समस्याओं के समाधान के लिए ग्रामीण सेवा शिविर का आयोजन किया जा रहा था। इस शिविर में उदाना निवासी गोमती एक बड़ी उम्मीद लेकर पहुंची। गोमती ने उपखंड अधिकारी लूणकरणसर के समक्ष उपस्थित होकर अपना  प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया।
​जब अधिकारी ने दिखाई संवेदनशीलता
​मामले की गंभीरता और आवेदक की परिस्थिति को देखते हुए उपखंड अधिकारी ने तुरंत संवेदनशीलता दिखाई। उन्होंने मौके पर मौजूद सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के प्रतिनिधि को  इस प्रकरण में तुरंत राहत प्रदान करने के निर्देश दिए।

​दफ्तर के चक्कर नहीं, अधिकारी खुद पहुंचे घर

​आमतौर पर सरकारी योजनाओं के लाभ के लिए जनता को दफ्तरों और कागजी औपचारिकताओं के चक्कर काटने पड़ते हैं, लेकिन यहाँ मानवता और कर्तव्यपरायणता की एक अनूठी मिसाल देखने को मिली।
​उपखंड अधिकारी के निर्देश मिलते ही विभाग के प्रतिनिधि ने  बिना समय गंवाए गोमती के दस्तावेजों की जांच की जिसमें गोमती का एक बच्चा विद्यालय ड्रॉप आउट कर चुका था उसे शिवीर में उपस्थित विद्यालय स्टाफ से वार्ता कर पुनः विधालय में प्रवेश दिलाया और अध्ययन प्रमाण पत्र जारी करवाकर पालनहार योजना से लाभान्वित किया 

गोमती की आँखों में संतोष:
 
गोमती भावुक हो उठी। उन्होंने मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा और राज्य सरकार का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि सरकारी काम इतनी संवेदनशीलता और तेजी से भी हो सकता है।

​सुशासन की जीती-जागती मिसाल: 

उदाना का यह वाकया यह साबित करता है कि ग्रामीण सेवा शिविर 2026 केवल कागजों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह धरातल पर अंतिम छोर के व्यक्ति को तुरंत राहत पहुँचाने का एक सशक्त माध्यम बन चुके हैं। 

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