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संभाग स्तरीय कार्यशाला आयोजित, विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधियों ने दिए सुझाव अन्य जिलों के लोग जुड़े वीडियो कांफ्रेंस से

 KBharat Times, बीकानेर




बीकानेर, 2 जुलाई। राजस्थान समान नागरिक संहिता-2026 (यूसीसी) के प्रारूप समिति की सदस्य डाॅ. शुचि चौहान ने कहा कि यूसीसी की मूल भवना सभी नागरिकों के लिए विवाह, विवाह-विच्छेद अथवा तलाक, भरण-पोषण और उत्तराधिकार आदि के लिए समान व्यवहार करते हुए समान विधि का निर्माण है। इसमें आमजन के सुझावों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। 

डाॅ. चौहान ने गुरुवार को बीकानेर विकास प्राधिकरण सभागार में यूसीसी के संबंध में आयोजित संभाग स्तरीय कार्यशाला में यह बात कही। उन्होंने कहा कि भारत के संविधान के अनुच्छेद-44 में यह प्रावधान है कि राज्य, भारत के समस्त राज्य क्षेत्रों में नागरिकों के लिए एक समान सिविल सहिता प्राप्त करने का प्रयास करेगा। अब तक उत्तराखण्ड़, असम और गुजरात में इस संबंध में कार्यवाही हो गई है। राजस्थान में भी राज्य सरकार द्वारा इस दिशा में कार्य प्रारम्भ कर दिया गया है। 

डाॅ. चौहान ने कहा कि सभी के लिए उपयोगी प्रारूप बने, इसके लिए अधिक से अधिक लोगों के सुझाव आमंत्रित किए जा रहे हैं। जितने अधिक सुझाव आएंगे, प्रारूप बनाने में अधिक सहूलियत होगी। उन्होंने कहा कि इसका व्यापक प्रचार-प्रसार जरूरी है। इसके लिए पौने तीन करोड़ लोगों को एसएमएस के माध्यम से सुझावों के लिए अपील की जा रही है। 

श्री विश्वकर्मा कौशल विकास बोर्ड के अध्यक्ष श्री राम गोपाल सुथार ने कहा कि हमारी सामाजिक, आर्थिक और पारिवारिक परम्पराओं का सम्मान करते हुए ऐसा प्रारूप बने, जिसके क्रियान्वयन से किसी वर्ग के साथ भेदभाव नहीं हो। यह कानून सभी का समान ध्यान रखे। 

संभागीय आयुक्त श्री विश्राम मीना ने कहा कि प्रभावी विधेयक बनाना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसके लिए अधिक से अधिक लोगों की भागीदारी जरूरी है। उन्होंने संभाग के चारों जिलों के अतिरिक्त जिला कलक्टर्स को निर्देश दिए कि प्रत्येक जिले के सुझावों को शुक्रवार तक प्रारूप समिति को उपलब्ध करवाएं। 

उपखंड और तहसील कार्यालय में दे सकेंगे सुझाव

संभागीय आयुक्त ने बताया कि आमजन संबंधित उपखंड अथवा तहसीलदार कार्यालय में भी यूसीसी से जुड़े सुझाव 10 जुलाई तक दे सकते हैं। इन सभी सुझावों को संधारित करते हुए प्रारूप समिति को सुपुर्द किया जाएगा। उन्होंने बताया कि यूसीसी की वेबसाइट https://ucc.rajasthan.gov.in/ पर भी सुझाव दिए जा सकेंगे। साथ ही इसके लिए क्यूआर कोड की व्यवस्था भी की गई है। जिसे स्कैन कर वेबसाइट तक पहुंचा जा सकेगा। 

गृह विभाग की संयुक्त शासन सचिव श्रीमती अंजलि राजोरिया ने समान नागरिक संहिता का परिचय दिया और इसके उद्देश्यों के बारे में बताया। उन्होंने बताया कि राजस्थान समान सिविल संहिता का विधेयक तैयार करने के लिए राज्य स्तर पर समिति का गठन किया गया है। यह समिति प्रत्येक संभाग स्तर पर दो दिनों तक जनसुनवाई करेगी। 

कार्यशाला में जिला कलक्टर श्री निशान्त जैन, अतिरिक्त जिला कलक्टर (नगर) श्रीमती रीना, बीकानेर विकास प्राधिकरण सचिव श्री हेमेन्द्र नागर, प्रशिक्षु आइएएस श्री मनु गर्ग सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी मोजूद रहे। कार्यशाला से चूरू, श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ जिले के जिला कलक्टर सहित विभिन्न धर्मगुरु, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि, शिक्षाविद्, विधिवेत्ता आदि मौजूद रहे। अतिरिक्त संभागीय आयुक्त श्री यशपाल आहूजा ने कार्यक्रम का समन्वय किया। 

प्रतिभागियों ने दिए सुझाव

    कार्यशाला में मौजूद विभिन्न वर्गों के लोगों ने राज्य सरकार की इस पहल का स्वागत किया और अपने सुझाव दिए। इनमें शिवबाड़ी महंत स्वामी विमर्शानंद महाराज, फादर थाॅमस, भाजपा अध्यक्ष श्रीमती सुमन छाजेड़, डाॅ. सत्यप्रकाश आचार्य, श्री अखिलेश प्रताप सिंह, श्री श्याम सिंह हाडला, प्रो. अमित कौशिक, प्रो. कुमुद जैन, जिला उद्योग संघ के सचिव श्री वीरेन्द्र किराडू, निर्विकल्प फाउण्डेशन के डाॅ. चंद्रशेखर श्रीमाली, इंडियन रेडक्राॅस सोसायटी के श्री विजय खत्री, श्री साजिद सुलेमानी, श्रीमती अर्चना सक्सेना, श्री संजीव पुरोहित आदि शामिल रहे। 

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