कं भारत टाइम्स, बीकानेर/लाडनूं,
लाडनूं, 27 जुलाई।तेरापंथ धर्मसंघ के ग्यारहवें आचार्य महाश्रमण ने आषाढ़ शुक्ला त्रयोदशी के पावन अवसर पर तेरापंथ धर्मसंघ के संस्थापक एवं आद्य अनुशास्ता महामना आचार्य भिक्षु के जन्म त्रिशताब्दी वर्ष के अंतर्गत आयोजित 'भिक्षु चेतना वर्ष' की पूर्णाहुति समारोह में अपने भावी उत्तराधिकारी की घोषणा करते हुए मुख्यमुनि महावीरकुमार को तेरापंथ धर्मसंघ का युवाचार्य नियुक्त किया।
जैन विश्व भारती परिसर स्थित सुधर्मा सभा में हजारों श्रद्धालुओं, साधु-साध्वियों एवं अनुयायियों की उपस्थिति में जैसे ही आचार्य महाश्रमण ने नियुक्ति की घोषणा की, पूरा प्रवचन पंडाल और आसपास का वातावरण जयघोष से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने इस ऐतिहासिक क्षण का उत्साहपूर्वक स्वागत किया।
अपने उद्बोधन में आचार्य महाश्रमण ने भगवान महावीर, आचार्य भिक्षु तथा पूर्वाचार्यों का स्मरण करते हुए कहा कि तेरापंथ धर्मसंघ की एक आचार्य परंपरा सदैव अनुशासन, मर्यादा और सुव्यवस्थित नेतृत्व की प्रतीक रही है। उन्होंने कहा कि आचार्य तुलसी और आचार्य महाप्रज्ञ ने जिस विश्वास के साथ उन्हें दायित्व सौंपा था, उसका निर्वहन वे निरंतर करते रहे हैं और भविष्य की व्यवस्था सुनिश्चित करना भी वर्तमान आचार्य का उत्तरदायित्व है।
आचार्य ने पूर्वाचार्यों की परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्तमान के साथ भविष्य का नेतृत्व भी सुदृढ़ होना चाहिए। इसी भावना के साथ उन्होंने मुख्यमुनि महावीरकुमार को संबोधित करते हुए कहा, "आओ मुनि महावीर!" और नियुक्ति-पत्र का वाचन करते हुए उन्हें अपने उत्तराधिकारी के रूप में युवाचार्य पद पर नियुक्त करने की औपचारिक घोषणा की।
घोषणा के उपरांत आचार्य महाश्रमण ने परंपरानुसार अपने हाथों से नवनियुक्त युवाचार्य महावीरकुमार को उत्तरीय ओढ़ाकर आशीर्वाद प्रदान किया तथा उन्हें आचार्य भिक्षु की अनुशासन, साधना और सेवा की गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाने का संदेश दिया।
इस ऐतिहासिक घोषणा के साथ तेरापंथ धर्मसंघ की उत्तराधिकार परंपरा को नया आयाम मिला और भिक्षु से प्रारंभ हुई अनुशासन एवं आध्यात्मिक नेतृत्व की गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण अध्याय जुड़ गया।
0 Comments