BREAKING NEWS
Welcome to K Bharat Times | Edit this text in the XML: Search for "kb-breaking" to change headlines.

जल संरक्षण और इसके सदुपयोग की नजीर बन रहे किसान, बूंद-बूंद का समुचित उपयोग कर कमा रहे अधिक मुनाफा

 BBT Times, बीकानेर



बीकानेर, 28 मई। मुख्यमंत्री श्री भजन लाल शर्मा की पहल पर 25 मई से 5 जून तक प्रदेशभर में चलाया जा रहा ‘वंदे गंगा, जल संरक्षण जन अभियान’, प्रदेशवासियों में जल संरक्षण और बूंद-बूंद पानी के सदुपयोग सहित आमजन में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरुकता का बड़ा माध्यम बन गया है। एक ओर जहां आमजन में जल संरक्षण की चेतना जगाई जा रही है, वहीं दूसरी ओर केन्द्र एवं राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं और कार्यक्रमों का लाभ लेते हुए किसानों और विभागों द्वारा बूंद-बूंद पानी का सदुपयोग कर मिसाल प्रस्तुत की जा रही है। 

किलचू देवड़ान के प्रगतिशील किसान श्री चतुर्भुज मेघवाल द्वारा राष्ट्रीय कृषि विकास योजना और राष्ट्रीय बागवानी मिशन के तहत अपने खेत में छह पाॅली हाउस व शेडनेट हाउस स्थापित किए गए हैं। यह नवाचारी किसान कठोर मेहनत करते करते हुए बड़ा मुनाफा कमा रहा है। उद्यान विभाग के सहायक निदेशक श्री मुकेश गहलोत ने बताया कि किलचू क्षेत्र में पानी की कमी है, ऐसे में बूंद-बूंद पानी के सदुपयोग को समझते हुए उसने 4 हजार वर्गमीटर में पाॅलीहाउस की स्थापना की। वर्तमान में उसे एक पाॅली हाउस से 500 क्विंटल तक खीरा मिल रहा है। 

पाॅली हाउस के निर्माण के लिए उसे लघु सीमांत श्रेणी के कृषक के रूप में 95 प्रतिशत अनुदान मिला। पाॅली हाउस में पानी की बूंद-बूंद का सदुपयोग हो रहा है। वहीं पाॅलीहाउस की छत पर वर्षा जल संग्रहण कर खेत तलाई में इसका संरक्षण कर बूंद बूंद सिंचाई के माध्यम से समुचित उपयोग किया जा रहा है। वर्तमान में राष्ट्रीय बागवानी मिशन योजना के तहत 2500 वर्ग मीटर पॉलीहाउस के निर्माण पर सामान्य कृषक को 50 प्रतिशत व लघु सीमांत श्रेणी के कृषक को 70 प्रतिशत अनुदान देय है।

किलचू के किसान हनुमान राम ने जल के महत्व को समझा और अपने खेत के पांच हैक्टेयर क्षेत्र में अनार का बागीचा स्थापित किया। हनुमान राम ने अपने खेत में बूंद-बूंद सिंचाई पद्धति से पानी का सदुपयोग किया और कम पानी में अधिक पैदावार कर ज्यादा मुनाफा कमाया। श्री गहलोत ने बताया कि कृषि की पारम्परिक तकनीक की बजाय बूंद-बूंद सिंचाई से वह दोगुना लाभ ले रहा है। वर्तमन में राष्ट्रीय बागवानी मिशन योजना के तहत उद्यान विभाग फल वृक्ष स्थापना में सामान्य अंतराल पर इकाई लागत 1 लाख 25 हजार साथ ही न्यून अंतराल सघन फल बगीचा स्थापना पर निर्धारित इकाई लागत दो लाख रुपए का 40 प्रतिशत अनुदान किसानों को उपलब्ध करवा रहा है।

कतरियासर में किसानों के घर बने 150 फार्म पौंड

प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना 2.0 के तहत कतरियासर गांव में 18.13 करोड़ रुपए की परियोजना स्वीकृत हुई है। इसके तहत जल संरक्षण के लिए टांका, फार्म पोंड, सार्वजनिक स्थानों पर रूफ टाॅप वाटर हार्वेस्टिंग स्ट्रक्चर, रिचार्ज शाफ्ट, जोहड़, जलबिंदू आदि कार्य करवाए जा रहे हैं। जलग्रहण के अधीक्षण अभियंता श्री महेश अजाड़ीवाल ने बताया कि वर्षा जल के संरक्षण के साथ इसके पुनर्भरण पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। बरसाती पानी की एक-एक बूंद संरक्षित हो और इसका उपयोग हो, इस दिशा में कार्य किया जा रहा है। अब तक किसानों के खेतों में करीब 120 फार्मपांड बनाए गए हैं। 

    प्रवेश बिंदु गतिविधि के तहत यहां कुएं, स्कूल की दीवार, बरसाती पानी निकासी नाला, टीनशेड आदि कार्य किए जा रहे हैं। करीब 90 बीघा भूमि पर 55 प्रजातियों के 10 हजार स्थानीय छायादार, फलदार, फूलदार और औषधीय पौधे लगाए जा रहे हैं। इससे क्षेत्र की पारिस्थतिकी में बदलाव आएगा। जीवों के लिए छाया और भोजन उपलब्ध होगा। आयुर्वेदिक औषधियों की उपलब्धता रहेगी। 

    श्री अजाड़ीवाल ने बताया कि कतरियासर गांव में मियावाकी पद्धति से करीब 19 हजार 474 पौधे और चारागाहों में करीब 7 हजार पौधे लगाए जाएंगे। इन चारों में भी सेवण, धामण, स्पाइनलेस और कैक्टस आदि घास भी लगाई जाएगी। वहीं 33 प्रजातियों के औषधीय, छायादार, फलदार और फूलदार पौध गलाए जाएंगे। इनसे बनने वाले उत्पादों को आर्थिक लाभ होगा और यह स्वास्थ्य की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण होंगे। उन्होंने बताया कि बडेड बेर की ग्राफ्टिंग, थार शोभा खेजड़ी, जाल, रोहिड़ा और बाहरी फूलदारों पौधे भी लगाए जाएंगे। 

बूंद-बूंद सिंचाई पद्धति से तीन हजार पौधों तक पहुंच रहा पानी

बीकानेर शहर से 15 किलोमीटर दूर विकसित हो रही है लवकुश वाटिका भी जल संरक्षण एवं इसके समुचित उपयोग का बड़ा उदाहरण बनी है। लगभग 27 हैक्टेयर क्षेत्र में फैली इस वाटिका में लगभग 3 हजार 500 पौधे लगाए गए हैं, जिन्हें बूंद-बूंद सिंचाई से जोड़ा गया है। यहां बरसाती जल संरक्षण के लिए दो नाडियां बनाई गई हैं। वहीं 2 लाख लीटर का स्वच्छ जलाशय भी बनाया गया है, जिसके माध्यम से भी पानी इन पौधों तक पहुंच रहा है। उप वन संरक्षक श्री संदीप कुमार ने बताया कि वाटिका में पानी के सरंक्षण और सदुपयोग पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
----- 

Post a Comment

0 Comments

Join WhatsApp Channel