कं भारत टाइम्स, बीकानेर
बीकानेर, 02 सितम्बर 2026 । भाकृअनुप–राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केन्द्र (एनआरसीसी), बीकानेर को अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (एएनआरएफ) के उन्नत अनुसंधान अनुदान (ARG-एडवांस्ड रिसर्च ग्रांट) के अंतर्गत थनैला रोग के एंटीबायोटिक-मुक्त उपचार की दिशा में एक महत्वपूर्ण अनुसंधान परियोजना स्वीकृत हुई है। इस परियोजना के अंतर्गत ऊँट के मेसेनकाइमल स्टेम सेल्स (मूल कोशिका) की थनैला रोग के उपचार के लिए एक अत्याधुनिक, वैज्ञानिक एवं वैकल्पिक उपचार संभावनाओं का परीक्षण किया जाएगा।
केन्द्र के निदेशक डॉ. अनिल कुमार पूनिया ने कहा कि थनैला रोग दुधारू पशुओं के स्वास्थ्य एवं दुग्ध उत्पादन से जुड़ी एक महत्वपूर्ण समस्या है। इसके उपचार में एंटीबायोटिक के अत्यधिक उपयोग से एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR) की चुनौती बढ़ रही है। ऐसे में एंटीबायोटिक के विकल्प के रूप में नई एवं प्रभावी उपचार पद्धतियों की खोज समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि स्टेम सेल आधारित यह अनुसंधान एनआरसीसी के उष्ट्र अनुसंधान को आधुनिक जैव-प्रौद्योगिकी एवं रीजनरेटिव मेडिसिन के उभरते क्षेत्रों से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
डॉ. पूनिया ने बताया कि एनआरसीसी द्वारा उष्ट्र स्वास्थ्य, उष्ट्र आनुवंशिकी एवं प्रजनन, शरीर कार्यिकी, पोषण प्रबंधन, ऊँटनी के दूध तथा कैमल इको-टूरिज्म सहित उष्ट्रपालन एवं उष्ट्रपालकों की आजीविका से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में अनुसंधान, तकनीकी विकास एवं प्रसार कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि केन्द्र का प्रयास है कि आधुनिक वैज्ञानिक अनुसंधान को उष्ट्रपालकों की वास्तविक आवश्यकताओं से जोड़ा जाए तथा ऐसी तकनीकों का विकास किया जाए, जिनका लाभ भविष्य में पशु स्वास्थ्य एवं उष्ट्रपालन के क्षेत्र में व्यापक रूप से प्राप्त हो सके।
केन्द्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं परियोजना के प्रधान अन्वेषक डॉ. रतन कुमार चौधरी ने प्रोजेक्ट विषयक जानकारी में कहा है कि अनुसंधान के अंतर्गत ऊँट के विभिन्न ऊतकों से मेसेनकाइमल स्टेम सेल्स को अलग कर उनकी चिकित्सीय क्षमता का अध्ययन किया जाएगा। प्रयोगशाला एवं प्रायोगिक मॉडल के माध्यम से थनैला रोग से संबंधित सूजन एवं संक्रमण की स्थिति में इनके संभावित प्रभावों का मूल्यांकन किया जाएगा। अनुसंधान के आगामी चरणों में उपचार की सुरक्षा एवं प्रभावशीलता का प्रीक्लिनिकल स्तर पर अध्ययन किया जाएगा।
डॉ. चौधरी के अनुसार अनुसंधान का दीर्घकालिक उद्देश्य थनैला रोग के उपचार के लिए एंटीबायोटिक-मुक्त वैकल्पिक उपचार की वैज्ञानिक संभावनाओं का पता लगाना है। यदि अनुसंधान के विभिन्न चरणों में अपेक्षित परिणाम प्राप्त होते हैं, तो भविष्य में इसके व्यापक पशु चिकित्सा उपयोग की संभावनाओं का भी अध्ययन किया जा सकेगा।
उल्लेखनीय है कि एनआरसीसी द्वारा दिनांक 03 सितम्बर, 2026 को प्रात: 11.30 अपने समिति कक्ष में प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन, स्वीकृत स्टेम सेल आधारित अनुसंधान परियोजना एवं इससे जुड़ी भावी अनुसंधान संभावनाओं के संबंध में मीडिया एवं आमजन को जानकारी उपलब्ध कराने के उद्देश्य से किया जा रहा है। इस अवसर पर परियोजना के वैज्ञानिक महत्व, अपेक्षित परिणामों तथा पशु स्वास्थ्य के क्षेत्र में इसकी संभावित उपयोगिता के साथ-साथ उष्ट्र संरक्षण एवं उष्ट्रपालकों के हित में केन्द्र द्वारा किए जा रहे प्रयासों की भी जानकारी साझा की जाएगी।
आप सभी प्रेस/मीडिया बन्धु सादर आमन्त्रित हैं। 🙏🏻
मीडिया प्रकोष्ठ,एनआरसीसीबीकानेर

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