सफाई कर्मचारी भर्ती-2026 में आरक्षण वर्गीकरण व संविदा व्यवस्था का विरोध, वाल्मीकि समाज ने मुख्यमंत्री को भेजा ज्ञापन

 कं भारत टाइम्स, बीकानेर/सवाई माधोपुर



स्थायी भर्ती, आरक्षण वर्गीकरण लागू करने, संविदा समाप्त करने और वाल्मीकि समाज को प्राथमिकता देने सहित पांच प्रमुख मांगें उठाईं

सवाई माधोपुर , 4 अगस्त। राजस्थान सरकार द्वारा जारी नवीन सफाई कर्मचारी सीधी भर्ती-2026 की विज्ञप्ति में आरक्षण वर्गीकरण, संविदा नियुक्ति तथा अनुभव प्रमाण-पत्र से जुड़े प्रावधानों के विरोध में प्रदेशभर के वाल्मीकि समाज में गहरा आक्रोश देखने को मिल रहा है। समाज के प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन भेजकर भर्ती प्रक्रिया में संशोधन करने तथा नई संशोधित विज्ञप्ति जारी करने की मांग की है।

ज्ञापन में कहा गया है कि भर्ती प्रक्रिया में शामिल कई शर्तें बेरोजगार युवाओं के हितों के विरुद्ध हैं और इससे वर्षों से सफाई कार्य से जुड़े परिवारों के साथ न्याय नहीं हो रहा है। समाज ने सरकार से तत्काल इन प्रावधानों में बदलाव कर भर्ती प्रक्रिया को अधिक न्यायसंगत एवं पारदर्शी बनाने की मांग की है।

समाज ने सबसे पहले भर्ती में लागू पांच वर्ष की संविदा व्यवस्था का विरोध करते हुए इसे कर्मचारियों का आर्थिक शोषण बताया है। ज्ञापन के अनुसार मात्र 7,410 रुपये प्रतिमाह मानदेय पर पांच वर्ष तक कार्य कराना उचित नहीं है। संगठन ने मांग की है कि संविदा व्यवस्था समाप्त कर अधिकतम दो वर्ष का परीक्षाकाल रखा जाए तथा इस अवधि में 12,400 रुपये प्रतिमाह वेतन दिया जाए। परीक्षाकाल पूर्ण होने के बाद कर्मचारियों को नियमित किया जाए।

ज्ञापन में भर्ती के लिए निर्धारित अनुभव प्रमाण-पत्र की शर्त पर भी आपत्ति जताई गई है। समाज का कहना है कि विज्ञप्ति में 1 अगस्त 2026 से पूर्व जारी अनुभव प्रमाण-पत्रों को अमान्य करना हजारों अभ्यर्थियों के साथ अन्याय है। सभी पूर्व में जारी वैध अनुभव प्रमाण-पत्रों को स्वीकार किया जाए तथा सक्षम अधिकारी के प्रमाणीकरण के नाम पर युवाओं को अनावश्यक परेशान नहीं किया जाए।

वाल्मीकि समाज ने यह भी मांग की है कि परंपरागत सफाई कार्य से जुड़े वाल्मीकि (मेहतर) समाज को भर्ती में 100 प्रतिशत प्राथमिकता दी जाए। समाज का कहना है कि पीढ़ियों से सफाई कार्य करने वाले परिवारों से अनुभव प्रमाण-पत्र मांगना उचित नहीं है। ऐसे अभ्यर्थियों को जाति प्रमाण-पत्र के आधार पर ही प्राथमिकता प्रदान की जाए और अनुभव प्रमाण-पत्र की बाध्यता समाप्त की जाए।

ज्ञापन में यह भी कहा गया कि वर्तमान एवं पूर्व में नगर निकायों, ग्राम पंचायतों तथा विभिन्न सरकारी विभागों में संविदा पर वर्षों से सफाई कार्य कर रहे कर्मचारियों को भर्ती में प्राथमिकता मिले। साथ ही सफाई व्यवस्था में प्रचलित ठेका प्रथा एवं आउटसोर्सिंग प्रणाली को समाप्त कर नियमित भर्ती की व्यवस्था लागू की जाए।

संगठन ने अपने ज्ञापन में 1 अगस्त 2024 को सर्वोच्च न्यायालय द्वारा एससी-एसटी आरक्षण में उप-वर्गीकरण संबंधी दिए गए निर्णय को भी राजस्थान में शीघ्र लागू करने की मांग की है। उनका कहना है कि इससे वंचित वर्गों को न्याय मिलेगा और आरक्षण का वास्तविक लाभ पात्र समुदायों तक पहुंच सकेगा।

वाल्मीकि समाज के प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि बेरोजगार युवाओं के भविष्य और सामाजिक न्याय को ध्यान में रखते हुए वर्तमान भर्ती विज्ञप्ति में आवश्यक संशोधन किए जाएं तथा नई संशोधित विज्ञप्ति जारी की जाए। संगठन ने यह मांग-पत्र मुख्यमंत्री, यूडीएच मंत्री, मुख्य सचिव तथा निदेशक, डीएलबी (राजस्थान सरकार) को ई-मेल के माध्यम से भी प्रेषित किया है।

समाज का कहना है कि यदि सरकार ने समय रहते मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो प्रदेशभर में आंदोलन की रणनीति पर भी विचार किया जाएगा।

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