KBHARAT Times, Bikaner
बीकानेर। बीकानेर की सदियों पुरानी पारंपरिक लघु चित्रकला को अपनी सूक्ष्म कला-साधना के माध्यम से देश-विदेश में पहचान दिलाने वाले वरिष्ठ कलाकार राजू स्वामी ने एक उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। उनके द्वारा बनाए गए एक अत्यंत छोटे बरगद के लघुचित्र में 17,480 पत्तों को हाथ से चित्रित करने के रिकॉर्ड को इंडियन बुक ऑफ रिकॉर्ड्स ने आधिकारिक रूप से मान्यता प्रदान की है। यह उपलब्धि न केवल राजू स्वामी की महीन चित्रांकन कला और वर्षों की साधना का प्रमाण है, बल्कि बीकानेर लघु चित्रकला शैली की अद्भुत सूक्ष्मता और शिल्प-कौशल को भी रेखांकित करती है।
3×4 इंच के चित्र में 17,480 पत्तों का सूक्ष्म संसार
राजू स्वामी द्वारा तैयार किया गया यह ऐतिहासिक लघुचित्र आकार में मात्र 3×4 इंच का है। इतने छोटे आकार के चित्र में उन्होंने बरगद के 17,480 पत्तों को एक-एक कर हाथ से चित्रित किया। प्रत्येक पत्ते को अत्यंत बारीकी और धैर्य के साथ बनाया गया है। इस चित्र की सबसे खास बात यह है कि इतने सूक्ष्म चित्रांकन के लिए उन्होंने किसी आधुनिक तकनीक या मशीन का सहारा नहीं लिया।
चित्र में पारंपरिक प्राकृतिक रंगों का प्रयोग किया गया है तथा बेहद महीन रेखाओं और पत्तियों को उकेरने के लिए गिलहरी के बालों से तैयार किए गए विशेष ब्रश का इस्तेमाल किया गया। राजू स्वामी ने यह सूक्ष्म चित्रांकन नंगी आंखों से, बिना किसी ऑप्टिकल उपकरण की सहायता के किया।
1999 में किया था रिकॉर्ड प्रयास, 27 साल बाद मिली आधिकारिक मान्यता
इस अनूठे रिकॉर्ड का प्रयास 10 अक्टूबर 1999 को बीकानेर, राजस्थान में किया गया था। लगभग 27 वर्षों बाद सितंबर 2026 में इंडियन बुक ऑफ रिकॉर्ड्स ने इस उपलब्धि को आधिकारिक रूप से मान्यता प्रदान की। रिकॉर्ड की मान्यता के साथ राजू स्वामी को रिकॉर्ड किट भी प्रदान की गई है।
लंबे समय तक सुरक्षित रही इस मूल कृति को अब रिकॉर्ड के रूप में आधिकारिक पहचान मिलना राजू स्वामी के लिए विशेष गौरव का विषय है। उल्लेखनीय है कि रिकॉर्ड में शामिल मूल पेंटिंग आज भी राजू स्वामी के पास सुरक्षित है।
पिता से मिली बीकानेर लघु चित्रकला की विरासत
राजू स्वामी का जन्म 18 फरवरी 1967 को बीकानेर में हुआ। उन्होंने बीकानेर की पारंपरिक लघु चित्रकला का प्रशिक्षण अपने पिता एवं वरिष्ठ कलाकार श्री गोर्धन दास स्वामी के मार्गदर्शन में प्राप्त किया। पारिवारिक कला परंपरा को आगे बढ़ाते हुए राजू स्वामी पिछले तीन दशकों से अधिक समय से बीकानेर की इस विशिष्ट कला शैली के संरक्षण, संवर्धन और प्रचार-प्रसार में सक्रिय हैं।
उनकी चित्रकला में पारंपरिक बीकानेरी लघु चित्र शैली के साथ-साथ प्रकृति, वनस्पति, पशु-पक्षियों और पेड़-पौधों के अत्यंत सूक्ष्म चित्रांकन की विशेष पहचान दिखाई देती है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी प्रदर्शित हो चुकी हैं उनकी कृतियां
राजू स्वामी की कला यात्रा केवल बीकानेर तक सीमित नहीं रही है। उनकी कृतियां देश और विदेश की विभिन्न प्रतिष्ठित प्रदर्शनियों में प्रदर्शित हो चुकी हैं। वर्ष 1995 में उनकी दो वनस्पति विषयक कृतियों का चयन आठवीं अंतरराष्ट्रीय वनस्पति कला एवं चित्रांकन प्रदर्शनी के लिए हुआ था। इसका आयोजन हंट इंस्टीट्यूट फॉर बॉटनिकल डॉक्यूमेंटेशन, कार्नेगी मेलॉन यूनिवर्सिटी, पिट्सबर्ग, अमेरिका में किया गया था।
इसके अलावा उनकी कला 1997 में पेरिस की गैलरी लाफायेत सहित देश की विभिन्न प्रमुख कला संस्थाओं और संग्रहालयों में भी प्रदर्शित हो चुकी है।
नई दिल्ली में आयोजित की लघु चित्रकला कार्यशाला
वर्ष 2012 में नई दिल्ली स्थित इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित “द बीकानेर स्कूल” प्रदर्शनी के दौरान राजू स्वामी ने पारंपरिक लघु चित्रकला की कार्यशाला भी आयोजित की। इस दौरान उन्होंने प्रतिभागियों और कला प्रेमियों को बीकानेर की लघु चित्रकला की बारीकियों, तकनीक और पारंपरिक चित्रांकन प्रक्रिया से परिचित कराया।
उनकी मूल कृतियां बीकानेर के प्राचीना संग्रहालय, जूनागढ़ किले में भी प्रदर्शित हैं, जिससे बीकानेर की कला विरासत में उनके योगदान को विशेष पहचान मिलती है।
अंतरराष्ट्रीय कला बाजार में भी बनी पहचान
राजू स्वामी की सूक्ष्म चित्रांकन शैली को अंतरराष्ट्रीय कला बाजार में भी पहचान मिली है। उनकी बरगद विषयक एक महत्वपूर्ण कृति “14675 लीव्स” वर्ष 2022 में नीदरलैंड्स के डी ज्वान में नीलाम हुई। इसी प्रकार उनकी अन्य चर्चित कृति “ए पीकॉक एंड स्क्विरल्स इन ए ट्री” वर्ष 2021 में लंदन के रोजबेरीज में नीलाम हुई।
इन नीलामियों से यह भी स्पष्ट होता है कि बीकानेर की पारंपरिक लघु चित्रकला को अंतरराष्ट्रीय कला संग्राहकों और कला बाजार में भी स्थान मिल रहा है।
भारत सरकार से भी सरकारी पंजीकृत शिल्पकार की मान्यता
राजू स्वामी को भारत सरकार के कपड़ा मंत्रालय के विकास आयुक्त, हस्तशिल्प कार्यालय द्वारा सरकारी पंजीकृत शिल्पकार के रूप में भी मान्यता प्राप्त है। पारंपरिक कला को जीवित रखने और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने में उनका योगदान महत्वपूर्ण माना जाता है।
कला प्रेमी देख सकते हैं ऐतिहासिक रिकॉर्ड वाली मूल पेंटिंग
राजू स्वामी की इस ऐतिहासिक उपलब्धि की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि 17,480 पत्तों वाली मूल रिकॉर्ड पेंटिंग आज भी उनके पास सुरक्षित है। कला प्रेमी इस दुर्लभ और ऐतिहासिक लघुचित्र को बीकानेर स्थित उनकी कला गैलरी एवं स्टूडियो ‘स्वामी आर्ट’, कीर्ति स्तंभ, लालगढ़ पैलेस रोड पर जाकर प्रत्यक्ष देख सकते हैं।
राजू स्वामी का यह रिकॉर्ड केवल एक कलाकार की व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है। 3×4 इंच के छोटे से चित्र में 17,480 पत्तों को हाथ से उकेरना धैर्य, एकाग्रता, तकनीकी दक्षता और वर्षों की कला-साधना का अद्भुत उदाहरण है। इंडियन बुक ऑफ रिकॉर्ड्स से मिली आधिकारिक मान्यता ने बीकानेर की पारंपरिक लघु चित्रकला की इस असाधारण क्षमता को एक नया मंच दिया है।
यह उपलब्धि बीकानेर के उन कलाकारों के लिए भी प्रेरणा है, जो अपनी पारंपरिक कला और विरासत को आधुनिक समय में जीवित रखते हुए उसे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयास कर रहे हैं।

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